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Wednesday, 26 August 2026

श्री नारायण शंकर माथुर ,:एक सहृदय व्यक्तित्व ------ विजय राजबली माथुर

 बबूए मामाजी अर्थात नारायण शंकर माथुर साहब हमारी मा के चचेरे भाई हैं जो आजकल बीमार चल रहे हैं उनके बड़े पुत्र विवेक से उनका हाल पता चलता रहता है। कल भाई विवेक का यह स्टेटस देख कर विस्मय हुआ । हमें इन मामा जी से बचपन से ही विशेष लगाव रहा है। अपने एक  ब्लाग में पहले जो लिखा है उसे पुनः यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। 



(श्री नारायण शंकर माथुर ,बेटों के साथ )
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नानाजी के एक भतीजे श्री नारायण शंकर माथुर तब आर्डिनेंस फैक्टरी ,शाहजहांपुर में ओवरसियर थे .वह फैक्टरी मंदिर की गतिविधियों में बढ़ -चढ़ कर भाग लेते थे .नानाजी को वहां बुलाते थे .नानाजी मुझे चलने को कहते थे तो मै भी साथ जाता था ,परन्तु अजय साथ नहीं जाते थे .संत श्यामजी पराशर के प्रवचन राज्नीतियुक्त होते थे ,उनमे मेरी गहरी दिलचस्पी थी .नानाजी ने उनकी लिखी पुस्तकें -"रामायण का ऐतिहासिक महत्त्व ","योगिराज श्री कृष्ण ","अपराधी कौन "आदि खरीद ली थीं .मैंने सभी पुस्तकें ध्यान से पढी थीं .अपने ब्लाग पर आज -कल लिखे विचार उन पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान के आधार पर हैं .अफ़सोस  यह है कि  वे पुस्तकें नानाजी के देहावसान के बाद (दीमक द्वारा खराब करने के कारण )माईंजी  द्वारा फेंक दी गयीं.मांगने की आदत न होने के कारण मैंने नानाजी से पहले और तब बउआ ने माईं जी से मांगी नहीं थीं वर्ना मेरे जैसे बुक -वार्म के मतलब की खराब दशा की किताबें भी थीं .नानाजी के ही पास महाभारत ,गीता और सत्यार्थ -प्रकाश भी पढ़े थे .तब का ही जो ध्यान में बचा है उसका उपयोग समय -२ पर लेखन में करता रहा हूँ अब भी कर रहा हूँ .संत श्यामजी पराशर केवल राम मंदिरों के प्रांगड़ में ही प्रवचन देते थे जिसकी समाप्ति इन शब्दों के साथ होती थी :-

love without marriage has no sens

Marriage without love has no fragrence .

 और कहते थे यह अंगरेजी पढ़े लिखे लोगों के लिए है और इसका तर्जुमा नहीं करूँगा .लेकिन मैंने इसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार किया है :-

                 विवाह रहित प्रेम बुद्धिहीन है -

                प्रेम रहित विवाह गंधहीन है .

संत पराशर के अनुसार राम -सीता विवाह आदर्श प्रेम -विवाह था 

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इस बार जिला स्तर पर मुझे प्रथम स्थान मिला था.स्कूल का वार्षिक समरोह शिवरात्रि पर होता था,उस अवसर पर मुझे जय शंकर प्रसाद की ''कामायनी''तथा शील्ड मिली.शील्ड तो एक माह बाद स्कूल में जमा हो गयी-कामायनी को ले कर माँ से उन के चचेरे भाई  नारायण शंकर माथुर साहब ने कहा की ७ वीं कक्षा में विजय को B A स्तर की किताब मिल गयी वह क्या समझेगा?(आगे सिलीगुड़ी में प्राचार्य ओझा जी ने एक बार बताया कि कामायनी के एक छंद को लेकर प्रतिष्ठित कवियों में विवाद छिड़ गया कि इसका यह अर्थ है -वह अर्थ है-फैसले के लिए जब वे कवि जय शंकर प्रसाद के पास पहुंचे तो उन्होंने उत्तर दिया -उस समय क्या सोच कर लिखा था मुझे याद नहीं है आप लोग अपने अपने हिसाब से मतलब निकाल लें)तो छायावादी रहस्यवादी काव्य का अर्थ समझना तो B A में भी संभव नहीं था.बहरहाल मामा जी कामायनी पुस्तक पढ़ने को ले गए फिर पूरा पढ़ कर लौटा दिए 



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बाबू जी शायद माँ और बहन को पहुंचाने के लिए सिलीगुड़ी से आये हुए थे-माँ के चचेरे भाई एन  एस मामजी  लगभग रूआंसे हो कर बोले-जीजा जी प्रेसिडेंट कैनेडी शॉट डेड.बाबु जी भी थोड़ा उदास हो गए.चीन के हमले के समय कैनेडी ने मदद का प्रस्ताव रखा था जिसे नेहरु जी ने ठुकरा दिया था.कैनेडी के प्रति देश में सहानुभूति थी.


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१९६१ - ६२ में जब  बाबूजी बरेली में पोसटेड थे तब यह मामाजी बरेली में इंजीनियरिंग पढ़ रहे थे और हास्टल में रहते थे। हम लोगों के घर गोला बाजार कई बार आए भी। बरेली मेंन बाजार जाते में कई बार  बाबूजी हम लोगों को भी रास्ते में उनके हास्टल मिलवाते गए । चीन युद्ध के समय जब बाबू जी का ट्रांसफर नान  फेमिली स्टेशन सिलीगुड़ी हो गया तो हम लोग नाना जी के पास शाहजहाँपुर में रहे हैं तब युद्ध के कारण इन मामाजी को भी जल्दी ही सर्विस लग गई थी और वह आर्डिनेंस फेक्टरी में जाब करने लगे थे। रोजाना ही हम लोगों से मिलते थे। 

दोबारा १९६७ में जब हम लोग शाहजहाँपुर में एक वर्ष नाना जी के पास रह कर पढे तब यह मामाजी अपने पढ़ने के लिए जो साप्ताहिक हिंदुस्तान, धर्म  युग आदि मेगजीन्स लेते थे मुझे भी पढ़ने को देते थे। कई  लेख मैंने लिख कर आज भी रखे  हुए हैं। 

पठन - पाठन में प्रोत्साहन देने में मेरे बाबूजी के बाद मा के इन चचेरे भाई नारायण शंकर मामाजी का भी बड़ा योगदान है इसलिए उनके साथ- साथ उनके बेटों से भी स्वभाविक लगाव है। उनकी बेटी तो लखनऊ में ही हैं उन बहन से भी संपर्क है। 

अतः जब कल विवेक का स्टेटस देखा तो पुराने लेख और यादें तरोताजा हो गए जिनको पुनः एकत्र करके लिख लिया है। हम मामा जी के शीघ्र एवं उत्तम स्वास्थ्य लाभ की मंगलकामना करते हैं।